तीन बच्चों माँ कागज पर ‘तीन तलाक’ लिख अपने पूर्व प्रेमी संग हुई फ़रार

मामला हरियाणा के यमुनानगर के एक गांब का है जहाँ एक मुस्लिम महिला ने अपने पति को कागज पर लिखकर तीन तलाक देने की खबर चर्चा का बिषय बनी हुई है|

महिला का पति मजदूरी का कार्य करता है पति जब वापस अपने घर लौटा तो उसे घर में एक चिट्ठी पड़ी मिली। जिसमें तीन तलाक लिखा हुआ था। जिंदगी सामान्य ढंग से चल रही थी इसी दौरान 15 जुलाई को जब वह काम से घर लौटा तो देखा कि घर से उसकी पत्नी और बच्चे गायब है।

घर में एक चिट्ठी रखी थी, जिस पर तीन तलाक लिखा हुआ था। पत्नी की इस हरकत के बाद पति ने अपने परिवार बालो से शिकायत की फिर एसपी के दफ्तर में पहुंच पत्नी के खिलाफ लीखित शिकायत दर्ज करवा दी है।

चिठ्ठी में महिला ने तीन तलाक लिखा हुआ था। पीड़ित पति ने एसपी दफ्तर जाकर पत्नी के फरार होने की शिकायत दर्ज करवायी।शिकायती पत्र में पति ने लिखा है कि 10 साल पहले उसका निकाह हुआ था। इस बीच उसके पांच बच्चे हुए। इनमें से दो बच्चों की मौत हो गई थी।

पीड़ित पति ने सिकायर मे बताया की घर मैं रखे हुए 60 हजार रुपए भी गायब थे। महिला का पति मजदूरी का काम करता है। जेसे तेसे घर का भरण पोषण चलाता है, पति ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी पत्नी पढ़ी लिखी नहीं है। उसने यह चिट्ठी किसी और से लिखवाई होगी।

तलाक पीड़ित पति की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर महिला की तलाश शुरू की। इस दौरान पुलिस ने महिला को खोज निकाला और उसे कोर्ट में पेश किया गया।

कोर्ट में महिला ने अपने पती पर शराबी पीकर मारपीट करने जेसे आरोप लगाऐ। इसलिए मैंने उसे लताक दिया है। अब मैं पति के नहीं, अपने प्रेमी के साथ रहना चाहती हूं।

महिला की इस तरहा के कदम के बाद जब देवबंद के शहरकाज़ी सैय्यद अजफर हुसैन से बात की तो उन्होंने कहा कि शरीयत में तलाक देने का अधिकार महिलाओं को नहीं है। यह हक़ सिर्फ पुरुषों को दिया गया है।

महिला को अगर तलाक चाहिए तो उसे दारुल कजा मे आवेदन देना होगा। यहां दोनों पक्षों को सुनने के बाद महिला पति से “खुला” ले सकती है।

इसके बाद पति पत्नी दोनों अलग-अलग अपनी शादी कर सकते हैं। दारुल कजा हर शहर में होती है। शहर काजी ही इस मामले में निर्णय लेते हैं।

इस्लाम के अनुसार पुरुष ही पत्नी को विशेष हालातों में तीन तलाक दे सकता है। कुरआन के मुताबिक तीन महीने में सुलह नहीं होने के बाद एक-एक करके तलाक दी जाए।

इस्लाम में पुरुषों के दुआरा एक साथ तीन तलाक को अच्छा नहीं माना जाता है। हाल ही में तीन तलाक के खिलाफ बिल पास हो जाने के बाद पति को भी यह अधिकार नहीं रह पाएगा।

हालांकि इस्लाम धर्म के जानकार इसे तलाक नहीं मानते हैं। उनके मुताबिक महिला को इस्लाम में तलाक का अधिकार नहीं है| अगर कोई महिला अपने पति से पीड़ित है तो महिला शहर काजी के सामने जाकर अपनी दलीलों के सबूत देकर निकाह तुड़वा सकती है|

लेकिन कोई मुस्लिम महिला खुद से तलाक नहीं दे सकती है। महिला अब भी पहले वाले पति की ही बीवी है इसलिए दूसरे मर्द से निकाह भी नाजायज है।