देश में अमीरों और गरीबों के बीच बड़ गयी खाई, देश में फैल रही है असहिष्णुता की भावना-प्रणब मुखर्जी

आज भारत सरकार के खिलाब समाज का एक बड़ा भाग नाराज नजर आ रहा है जिस तरह से आज राम मंदिर को चुनाव का मुद्दा बनाया जा रहा है उससे धार्मिक भावनाओं पर ठेश पहुचना लाज़मी है देश आज एक अलग राह पर चल पड़ा है पुरे विश्व में शांति का प्रतीक माना जाने वाला भारत जिसमें सभी जाती धर्म के लोग एक साथ रहते हैं कुछ राजनैतिक पार्टियाँ अपने स्वार्थ के लिए इसका महत्व कम कर देना चाहतीं हैं ये प्रत्येक भारतीय के लिए यह एक बहुत चिंता का विषय है पूर्व राष्ट्रपति का इस पर कहना है|

शुक्रवार के दिन 23 नवम्बर को भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राजधानी दिल्ली में आयोजित एक सम्मलेन में देश में अमीर और गरीब के बीच बड़ रही खाई के बारे में बताया साथ देश में बड रही असहिष्णुता की भावना और मानवाधिकारों के हनन से देश को नुकसान पहुँच रही है|

आयोजन नई दिल्ली में सेंटर फॉर रिसर्च फॉर रूरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के द्वारा किया गया था जिसमे प्रणब मुखर्जी चीफ गेस्ट के रूप में थे देश में बड रहे गुस्से और असहिष्णुता की भावना से देश नफरत और जहर की तरफ बड रहा है वो भारत जिसने दुनिया को वसुधेव कुटुम्बकम की भावना से परिचय करवाया उन्होंने कहा की जब देश सहिष्णुता को अपने में स्वीकार करता है तो पुरे देश के बहुत से समुदायों में सद्भावना को प्रोत्साहन मिलता है|

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने महान व्यक्ति चाणक्य को याद करते हुए बताया कि अगर देश की प्रजा खुश है तो हमारा देश भी खुश है प्रणब मुखर्जी ने अपने इस भाषण में कहा है कि आम आदमी को ख़ुशी तब मिलेगी जब भारत में भुखमरी और बेरोजगारी दूर होगी प्रसन्नता की रैंकिंग जब 113 पर होगी तब ही देश का बिकास दिखेगा तब नहीं जब भारत की रैंकिंग 119 है|

जिस तरह आज भारत पिछड गया है उसको आगे बढ़ाने की जरुरत है गुरुनानक जी की जयंती पर उनको याद करते हुए उन्होंने बड़ी श्रद्दा के साथ गुरुनानक जी को याद किया और कहा की उन्होंने देश के एकता का सन्देश दिया है| जब रोज सुबह अख़बार देखता हूँ तो में बहुत दुखी होता हूँ | जिस तरह से आज देश में कुपोषण और भुखमरी के स्तर बड़ रहा है इसपर काम होने की जरुरत है|