इजरायल के समर्थन में सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने दिया ये बयान | Social Awaz

इजरायल के समर्थन में सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने दिया ये बयान

सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कहा है कि इजरायल को अपनी जमीन पर शांति से रहने का अधिकार है। सलमान ने ये बयान एक इंटरव्यू में दिया। बिन सलमान ने इस बयान से रियाद और तेल अवीव के बीच रिश्तों के पास होने के संकेत भी दे दिया।

जब बिन सलमान से यह पुछा गया की “क्या उनका मानना ​​है कि यहूदी लोगों को अपने पूर्वजों के देश के कम से कम हिस्से में राष्ट्र-राज्य का अधिकार है”?

तो उन्होंने कहा की “मेरा मानना ​​है कि फिलीस्तीनियों और इजरायल को अपनी जमीन में रहने का अधिकार है, लेकिन हमें सभी के लिए स्थिरता सुनिश्चित करने और सामान्य संबंध रखने के लिए शांति समझौता करना होगा।

बता दें सऊदी अरब ने पिछले महीने इजरायल के लिए एक वाणिज्यिक उड़ान के लिए पहली बार अपने हवाई क्षेत्र को खोला था।

गाजा पट्टी एक छोटे सा फिलिस्तीनी क्षेत्र है, यह मिस्र और इसरायल के मध्य भूमध्यसागरीय तट पर स्थित है। फिलिस्तीन अरबी और बहुसंख्य मुस्लिम बहुल इलाका है। इस पर ‘हमास’ द्वारा शासन किया जाता है जो इजरायल विरोधी आतंकवादी समूह है.

वो यूं क्योंकि फिलिस्तीन और कई अन्य मुस्लिम देश इजरायल को यहूदी राज्य के रुप में मानने से इनकार करते हैं. 1947 के बाद जब UN ने फिलिस्तीन को एक यहूदी और एक अरब राज्य में बांट दिया था जिसके बाद से फिलिस्तीन और इजरायल के बीच संर्घष जारी है जिसमें एक अहम मुद्दा जुइस राज्य के रूप में स्वीकार करना है.

तो दूसरा गाजा पट्टी है जो इजराइल की स्थापना के समय से ही इजरायल और दूसरे अरब देशों के बीच संघर्ष का कारण साबित हुआ है।

जून 1967 में जब दूसरी जंग हुई तो 6 दिनों तक चली, जिसमें इजरायल ने फिर से गाजा पट्टी पर कब्जा कर लिया। इजरायल का यह कब्जा 25 सालों तक चला लेकिन दिसंबर 1987 में गाजा के फिलिस्तीनियों के बीच दंगों और हिंसक झड़प के कारण और इजरायली सैनिकों पर कब्जा करने से एक विद्रोह का रुप दे दिया।

1994 में इजरायल ने इजरायल और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) द्वारा हस्ताक्षरित ओस्लो समझौते की शर्तों के तहत फिलिस्तीनी अथॉरिटी (पीए) को गाजा पट्टी में सरकारी प्राधिकरण का चरणबद्ध स्थानांतरण शुरू किया था.

साल 2000 की शुरूआत में, पीए और इजरायल के बीच वार्ता नकाम होने के कारण हिंसा अपने चरम रुप में पहुंच गया जिसे खत्म करने के रुप एवज में इजरायल के प्रधानमंत्री एरियल शेरोन ने 2003 के अंत में एक योजना की घोषणा की थी जिसके तहत गाजा पट्टी से इजरायल सैनिकों को वापस हटने और स्थानीय निवासियों को बसाने पर केंद्रित है.

सितंबर 2005 में इज़रायल ने क्षेत्र से पलायन पूरा कर लिया, और गाजा पट्टी पर नियंत्रण को पीए में स्थानांतरित कर दिया गया था, हालांकि इज़रायल ने इसके क्षेत्ररक्षण और हवाईगश्त को जारी रखा.

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