हिन्दू संगठनों ने किया ऐलान अब गुरुग्राम में रमज़ान के महीने में खुले में नमाज़ पढ़ने वालों की…

देश की राजधानी दिल्ली से सटे हुए गुरुग्राम में नमाज़ को लेकर कई दिनों से विवाद चल रहा था, इस घटना को लेकर कई तरफ की बातें की गई. गुरुग्राम में पिछले महीने मैदान में नमाज़ पढ़ते हुए नमाजियों को परेशान करने का इस वीडियो सामने आया था.

सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने के बाद हंगामा मचाने वालों के खिलाफ पुलिस ने करवाई की थी. इसके बाद से ही ये मामला तुल पकड़ने लगा. इस कार्यवाई का हिन्दू संगठनों ने विरोध किया, और अगले जुमें पर लगभग 12 जगहों पर नमाज़ पढ़ने से रोका था. इसके बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री ने भी खुले मैदान में नमाज़ पढ़ने पर विवादित टिपण्णी की थी.

दरअसल गुरुग्राम में कई बड़ी कम्पनियाँ मौजूद है, इन कंपनियों में काम करने वाले मुस्लिम कर्मचारी काफी लम्बे समय से जुमें की नमाज़ किसी मैदान में पढ़ने के लिये इकठ्ठा हो जाते थे.

रमजान के शुरू होने के साथ ही अब हिन्दू संगठनों ने कहा है कि रमाज़न उल मुबारक के महीने में नमाज़ पढ़ने का कोई विरोध नही होगा, प्राप्त हुई सुचना के मुताबिक गुरुग्राम में खुली जगहों पर शुक्रवार की नमाज़ से एक दिन पहले रमजान के महीने के पहले दिन संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति ने आश्वासन दिया है कि इस पवित्र महीने के अभ्यास के दौरान कोई विरोध नहीं होगा, या नमाज़ के दौरान कोई व्यवधान नहीं होगा. हलाकि कुछ हिन्दू वादी संगठन इस फैसले से सहमत नहीं है.

पिछले दिनों गुरुग्राम में खुले मैदानों में जुमे की नमाज पढ़े जाने का कुछ हिंदूवादी संगठनों ने विरोध किया था. इसको लेकर विवाद उठ गया था. इसी मामले को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा था कि नमाज मस्जिदों और ईदगाहों में ही पढ़ी जानी चाहिए.

इसके बाद में प्रशासन ने जुमे की नमाज के लिए कुछ स्थान तह किए थे, लेकिन कुछ संगठन इसका विरोध कर रहे हैं. हिंदूवादी संगठनों के इस विरोध के बाद उठे विवाद के स्थायी समाधान के लिए राज्य वक्फ बोर्ड ने अपने अधिकार क्षेत्र के भूखंडों का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है.