70 साल बाद मिले भाई बहन, भारत पाकिस्तान बटवारे के समय हो गए थे अलग मिलकर बहुत रोये

हमारे में परिवार में कई तरह के रिश्तें है इनमें कुछ बहुत ही पवित्र होते हैं भाई बहिन का रिश्ता सबसे पवित्र रिश्ता माना जाता है भाई हमेशा अपनी बहन को पलकों पर बिठा के रखता है इस संसार में इससे ज्यादा पवित्र रिश्ता कोई नहीं होता है| रक्षा बंधन में बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी हमेशा रक्षा करेगा ये कसम खाता है लेकिन भाई बहन के प्यार की ऐसी मिसाल आपने कभी नहीं देखी होगी है आज हम आपको एक ऐसे ही भाई बहन के रिश्ते के वारे में बताएँगे|

पाकिस्‍तान में स्थित पंजाब प्रांत में स्थित ननकाना साहिब में हर साल बहुत बड़ी संख्‍या में भारतीय सिख श्रद्धालु भी जाते हैं।इसी तरह इस साल भी भारतीय सिख श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्‍था गुरुनानक जयंती के मौके पर यहां दर्शन के लिए पहुंचा। लेकिन इस बार की यात्रा कुछ अलग ही रही। जो कभी भी न भूली जाएगी।

जब भारत और पाकिस्तान के विभाजन के 70 साल बाद दो मुस्लिम बहनें अपने प्यारे सिख भाई से मिलीं है। डेरा बाबा नानक के बहुत पास में स्थित एक गांव में ताल्लुक रखने वाले इन तीनों भाई बहनों की बातचीत रविवार को पाकिस्तान  में स्थित गुरु नानक जी के जन्म स्थल ननकाना साहिब गुरुद्वारे में हुई है। 70 साल बाद अपने भाई बेअंत सिंह को देखकर बहन उल्फत बीबी और मैराज बीबी ने अपने गले लगा लिया। लेकिन इन 70 सालों से भी ज्यादा के समय मे बहुत कुछ बदल गया है। बहनें अब पाकिस्‍तान में रहती हैं और इस्लाम धर्म को स्वीकार कर चुकी हैं लेकिन उनका भाई अभी सिख धर्म का पालन करता हैं।

खबर के अनुसार मुस्लिम बहनें उल्‍फत बीबी और मिराज बीबी 70 साल के बाद अपने सिख भाई बेअंत सिंह के गले मिलीं हैं जिन बहनों से इस दौरान उनकी बातचीत नहीं हो पाई| हालांकि इस दौरान उनके बीच में चिट्ठ‍ियों का आदान-प्रदान होता रहा है।दोनों बहनों और सिख उनके भाई का परिवार स्थाई रूप से भारत में स्थित पंजाब राज्‍य में गुरदासपुर जिले के  छोटे से गाँव डेरा बाबा नानक के समीप स्थित पारचा गांव का रहने वाले है। 1947 के विभाजन के दौरान जब विभाजन हुआ तब बड़ी संख्‍या में भारत और पाकिस्तान की ओर से लोगों ने पलायन किया था। इसी दौरान बेअंत सिंह का पूरा परिवार पाकिस्‍तान को जा रहा था जब दोनों बहन और भाई आपस में बिछड़ गए|दोनों बहनें तो पाकिस्‍तान में परिवार के साथ बस गईं, लेकिन बेअंत सीमा पार नहीं कर पाए और भारत में ही रह गए।