भाईचारे की मिसाल: मंदिर अध्यक्ष ने दी मस्जिद के लिए जमीन, लोगों ने की जमकर तारीफ

आपने अक्सर ऐसा देखा होगा की, लोग हिन्दू-मुस्लिम को लेकर ही सबसे ज़्यादा विवाद फैलाते है और आज-कल तो सरकार भी इन्ही धर्मो का फायदा लेकर चुनाव जित रही है. यही हिन्दू से मुस्लिम की बुराई करके उनके दिलो में नफरत की भावना पैदा कर रहें हैं. उसी और एक देवता ने हिन्दू-मुस्लिम की एकता की मिसाल पेश की हैं.

मंदिर के अध्यक्ष द्वारा दी गई मस्जिद के लिए ज़मीन,

न्यूज़ के अनुसार पता चला है की, यह मामला “दक्षिण कन्नड़ जिले” का हैं. इस जगह “एलिया श्री विष्णुमूर्ती मंदिर” के अध्यक्ष ‘मोहन राय’ ने अपनी ज़मीन का 12 सेंट मस्जिद में दिया है. जो उनकी पूरी ज़ायदाद के बराबर है.

यह ‘ओलेमुंडोवू गांव’ का रहने वाला है जिसको मस्जिद प्रशासन ने धन्यवाद कहा है और उनके इस दोस्ती के कदम को सर्वोपरि रखा. सिर्फ मस्जिद प्रसाशन ही नहीं कई लोग उनके इस फैसले की प्रशंसा कर रहें हैं और उन्हें आज के युग का असली हीरो बता रहें है और उन्होंने कहा की दुनिया में कितनी ही बुराई पैदा हो जाए, लेकिन सच्चाई, ईमानदारी का एक अंश तो रही जाता है और वो यह हैं.

मोहन राय की मीडिया से मुलाकात

राय ने अपने भाषण में बताया की, भारत में सबसे बड़ी जिम्मेदारी हिन्दू-मुस्लिम को एक करना है और इसके सिवा कुछ नहीं, जिस दिन यह एकता में बदल गयी उस दीन के बाद कोई भी देश भारत से आगे नहीं निकाल सकता. राय ने कहा की, मस्जिद मेरी संपत्ती के बिलकुल बराबर के हिस्से में है.

और मस्जिद कमेटी को इसका विस्तार करने के लिए जमीन की आवश्यकता थी, जो मेरे पास थी. तो उन्होंने उन्हें दे दी. और कहा की, बेशक हमारे अलग-अलग धर्म है लेकिन हमारा एक ही भगवान है और में कोई धर्म के नाम पर कोई भेदभाव नहीं करता हूँ उन्होंने कहा की हमें सभी धर्मो का सम्मान करना चाहिए और किसी के धर्म की निंदा नहीं करना चाहिए सभी का इसी में हित हैं.

खबरों के अनुसार पता चला है की मस्जिद की कमेटी ने मोहन राय से सिफारिश की थी की उनको मस्जिद के विस्तार के लिए थोड़ी ज़मीन की ज़रूरत है इसके बाद राये 12 दिसंबर को मस्जिद के कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां पर उन्होंने मस्जिद कमेटी के प्रेसिडेंट ‘पुथु मोनू’, ‘खातिब सय्यादलावी थंगल मस्तिकुंडु’, नेता ‘उमर मुस्लियार’ और रेंजलादी इस्लामिक सेंटर के कन्वेनर केआर हुसैन दरीमी को जमीन सौंप दी.

उसके बाद वहां के लोगो ने कहा की आपको एक इतिहास के रूप में याद किया जाएगा और आप हिन्दु-मुस्लिम के लिए एक मिसाल का जरिया भी बने है जिसे समझकर सभी धर्मो के भेदभाव को मिटा देने के लिए आपका नाम उजागर किया जाएगा. भारत के अंदर हिन्दू-मुस्लिम की एकता से बढ़कर कुछ भी नहीं है. हम सभी को एक होकर अपने देश को आगे बढ़ाना चाहिए.