अमेरिका के खिलाफ जिहाद के लिए मुस्लिमों को भड़काने की कोशिशें करता अल कायदा, जारी किया वीडियो

अल कायदा आतंकी मान अल जवाहिरी ने अमेरिका के खिलाफ मुस्लिमों को हथियार उठाने को कहा है. ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद, अल कायदा का सबसे बड़ा नेता जवाहिरी ही है.

अल जवाहिरी ने कहा कि अमेरिका का येरुशलम में अपना दूतावास ले जाना इस बात का सबूत है कि फिलिस्तीन के साथ बातचीत और शांति की कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि अब मुस्लिमों को अमेरिका के खिलाफ जिहाद करना चाहिए.

आपको बता दें कि पिछले साल दिसंबर में अमेरिका ने येरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दी थी. अब वह अपना दूतावास भी तेल अवीव से येरुशलम शिफ्ट कर रहा है.

जवाहिरी ने मुस्लिमों की भी धरती है तेल अवीव के नाम से एक वीडियो जारी किया है जो लगभग 5 मिनट का है, इस वीडियो में उसने मुस्लिमों से अपील की है. जवाहिरी एक मिस्री मूल का शख्स हैं जो डॉक्टर है और 2011 में लादेन के मारे जाने के बाद से ही वह अल कायदा का सबसे बड़ा नेता है.

जवाहिरी के आनुसार डोनाल्ड ट्रम्प की सोच एकदम साफ है. अब वक्त आधुनिक जिहाद का है, जिसमें शांति की कोशिशें नाकाम ही रहेंगी. अगर हमें बचे रहना है तो हथियार उठाना ही होगा.

अमेरिका को बिन लादेन ने अपना सबसे बड़ा दुश्मन करार दिया था. तब तक सुरक्षा स्थापित नहीं हो सकती, जब तक सेनाएं मोहम्मद की धरती नहीं छोड़ देतीं.

13 मई को इजरायल में येरुशलम डे के मौके पर अमेरिकी समर्थकों ने मार्च निकाला. इसके आलावा आज अमेरिका अपना राजदूत तेल अवीव से येरुशलम शिफ्ट करेगा.

इजरायल ने 1948 में आजादी की घोषणा करते हुए अपने आप को एक अलग देश के रूप में मान्यता दी थी. तब इजरायल से करीब 7 लाख फिलिस्तीनियों को देश छोड़कर जाना पड़ा था. सारे घटनाक्रम के बीच फिलिस्तीनियों ने गाजा पट्टी में एक बड़े प्रदर्शन की तैयारी की है.

दरअसल इजरायल अपनी राजधानी पूरे येरूशलम को बताता है, जबकि फिलिस्तीनी पूर्वी येरूशलम को अपनी राजधानी बताते हैं. येरुशलम को इजरायल ने 1967 में कब्जे में ले लिया था. यहां यहूदी, मुस्लिम और ईसाई तीनों धर्मों के पवित्र स्थल हैं.साथ ही यहां स्थित टेंपल माउंट जहां यहूदियों का सबसे पवित्र स्थल है, वहीं अल-अक्सा मस्जिद को मुसलमान पाक मानते हैं.

पुरे येरुशलम पर इजरायल के दावे को यूएन और दुनिया के ज्यादातर देश मान्यता नहीं देते हैं. यहाँ किसी भी देश की एम्बेसी नहीं है, जबकि बता दें कि तेल अवीव में 86 देशों की एम्बेसी हैं. 1948 में इजरायल ने अपनी आजादी घोषित कि थी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *