मंदिर निर्माण की आड़ में घोटाला छुपा रहे हैं शिया बोर्ड के वसीम रिजवी’

अयोधिया में बाबरी मस्जिद -राम मंदिर के विवाद के लिए सुप्रीम कोर्ट में मसौदा पेश किया गया. शिया वक्फबोर्ड के मुताबिक विवादित जगह पर राम मंदिर बनाया जाये और मस्जिद का फैसला लखनऊ में बनने का फैसला लिया गया है और इस मस्जिद का नाम “मस्जिद ए अमन ” रखा जाये पर इस समझोते से मुस्लिम समुदाय राज़ी नहीं है.

इस समझोते के चलते हुए उन्होंने मुस्लिम समुदाय बात की और उनका कहना की वह इस फैसले से सहमत नहीं है लेकिन मुस्लिम समुदाय को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आदर्श मानना चाहिए इसका और कोई निराधार नहीं करना चाहिए.

मुस्लिम समुदाय में पक्चधर ने कहा की भ्रस्टाचार के आरोपों से बचने के लिए और अपने फायदे के लिए हमेश आलाप रहे और मुस्लिम समुदाय को इस फैसले को सर्वोपरि मानकर इसका आदर करना चाहिए यह फैसला हमारे देश के लिए हितकारो साबित होगा !

इस मसौदे को क़ानूनी मान्यता नहीं- खालिक

खालिक का कहना है की राम मंदिर के बनने से उसे कोई हर्ज नहीं है पर वह मंदिर सिर्फ अपनी जगह ही बनाया जाये न की मस्जिद की जगह पर इस फैसले से उनको और उनके समुदाय को काफी ठेस पहुंची है. रिजवी जी कहना है की वह मस्जिद अगर लखनऊ में बनाई जाये तो बाबरी मस्जिद नहीं कहलाएगी.

अयोधिया के मामले में अपील कर्ता का कहना है की रिजवी जी की अपनी एक गए है उनका क़ानूनी फैसले कोई सम्बन्ध नहीं है और यह फैसला मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लिया गया है !

फिरंगी महली _ मसौदे पर निजी मुफीद की अपनी राय

फिरंगी महली का कहना है की मस्जिद का फैसला सही लिया गया है वह सुप्रीम कोर्ट के मामले में बाधा उत्पन्न कर रहे है वह सिर्फ मिडिया में बने रहने के लिए फालतू के भाषण बाजी दे रहे है ! मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के सदस्य का कहना है की शिया वक्फ बोर्ड के मसौदे की कोई एहमियत नहीं है.

हाई कोर्ट ने सन १९४७ में साफ कर दिया था की बाबरी मस्जिद वक्फ बोर्ड की नहीं बल्कि सुन्नी वक्फ बोर्ड से सम्बंद रखता है ! मुस्लिम समुदाय इस फैसले की निंदा नहीं करते हुए इसे मानना चाहिए ये सभी राजनितिक समस्याएं उत्पन्न कर रहे है उन्हें सहमत होकर सियासत के मामले को ख़त्म कर देना चाहिए !